टैटू संस्कृति की दुनिया में, जहाँ स्याही पारंपरिक रूप से आत्म-अभिव्यक्ति और सौंदर्यशास्त्र का साधन रही है, एक मौलिक बदलाव आ रहा है। विज्ञान त्वचा में शाब्दिक रूप से नए कार्य ‘प्रत्यारोपित’ कर रहा है। बोइस स्टेट यूनिवर्सिटी (BSU) के शोधकर्ताओं ने एक बहुक्रियाशील इलेक्ट्रॉनिक टैटू (ई-टैटू) का अनावरण करके एक बड़ी सफलता हासिल की है जो केवल त्वचा पर नहीं चिपकता, बल्कि उसका विस्तार बन जाता है। यह अभिनव मंच ऊर्जा संचयन, भंडारण और बायोमेट्रिक संवेदन को एक ही, अल्ट्रा-पतले ढांचे में एकीकृत करता है।