गर्मी स्वतंत्रता, धूप और नए अनुभवों का समय है, लेकिन उन लोगों के लिए जिन्होंने हाल ही में कान के उपास्थि छिद्रण करवाया है, यह एक वास्तविक परीक्षा हो सकती है। कान के हेलिक्स और इंडस्ट्रियल छिद्रों में ठीक गर्मी में ही “नखरे” क्यों करने लगते हैं? इसका उत्तर हमारे शरीर की शरीर-क्रिया विज्ञान और उपास्थि ऊतक में सूक्ष्म परिसंचरण की विशेषताओं में निहित है। इस लेख में, हम विस्तार से बताएंगे कि गर्मी लसीका प्रवाह को कैसे प्रभावित करती है, कान विशेष रूप से सूजन के प्रति संवेदनशील क्यों होते हैं, और गर्मियों के दौरान छिद्रण की देखभाल के लिए व्यावहारिक सुझाव देंगे।